
आज फिर मुझे अहसास हुआ की बचपन में पड़ी हुई बाबा bharti की कहानी कितनी सही थी - कहानी कुछ असी थी की बाबा के पास एक बहुत ही सुंदर सफ़ेद घोड़ा था और एक डाकू उसको पाना चाहता था , पर बाबा किसी भी कीमत पर उसको देने तो तय्यार नही थे । एक बार बाबा अपने घोडे पर कही से जा रहे थे तो रस्ते में एक लंगडा भिखारी मिला जो चले फिरने से लाचार था , बाबा को उस पर बहुत दया आ गयी और उन्होंने उसे अपने साथ बैठा लिया थोडी ही देर में उस भिखारी ने बाबा को घोडे पर से धक्का दे कर गिरा दिया और बाबा ने दकेह वोह भिखारी और कोई नही बल्कि डाकू ही था , उस ने हस कर बाबा से कहा की देखो मैंने तुमसे घोड़ा हथिया ही लिया , तो बाबा ने उससे कहा वोह तो ठीक है पर एक बात याद रखना आगे से ऐसा मत करना नही तो लोग लाचारों पर दया करना छोड़ देंगे ...उन पर विश्वास करना छोड़ देंगे
आज पति के परिप्रेश्केय में यह बात उतिनी ही सही लगती है , आप कितना भी करो उन पर कभी विश्वास मत करो , सब कहते है की गृहस्थी की गाड़ी विश्वास से चलती है पर एक तरफा विश्वास किस काम का ...
आप ख़ुद कभी अजमा कर देख लेना यदि सब कुछ नोर्मल चलता है तो वोह भी खुश रहेगे आप जरा सी पानी बात कहिये अपने मायके की बात कीजिये फिर द्खेइए उनके तेवर ... सारा प्यार उड़न छू हो जाता है ...
कुछ लोग exception भी होते है पर बहतु से लोग ऐसे ही होते है यह में ऐसे ही नही कह रही हू जनाब बहुत लोगो से सर्वे कर के यह नतीजा निकला है
क्यो पत्नियों को मन को मार कर पतियों की बात मन्ना पड़ता है , जबकि उनको कोई restriction नही है मनो या न मनो बहुत लोग यह सोच रहे होगे की यह तो सरासर नारी जाग्रति की बात है ऐसा कुछ नही है , जो आदमी अपनी पत्नियों की बात मानते है उनकी इज्ज़त करते है उनसे बड़ा भाग्यवान और कोई दूसरा नही है पर जो बस अपने मन की करते है या अपने माँ बाप की मन की करते है अपनी पत्नी की इज्ज़त नही करते है उनसे बड़ा ... शैतान भी कोई नही है .
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