Friday, November 27, 2009

sath

साथ - एक छोटा सा पर बहुत बड़ा शब्द है , इसके बहुत मायने होते है,जिंदगी में किसी का साथ होना बहुत जरुरी है । साथ बहुत तरह का हो सकता है -
भावनात्मक
शारीरिक
मानसिक आदि

साथ के यह तीनो रूप ही जरुरी है , जिस के पास एक भी कम होता है वही जान सकता है की साथ का क्या महत्व है । एस सब को मालूम है में यह सब क्यो बता रही हू ,वोह इसलिए बता रही हू की मुझे जानने की इच्छा है की किस तरह की साथ की असल परिभाषा क्या है ? आप किसी का साथ देने का वादा करते है to क्या हर परिस्त्थी में साथ देंगे ? ग़लत सही जो भी हो ? वोह जो भी करे ? उदाहरण के लिय जब भी मुझे किसी पर गुस्सा आता है to मेरा साथी मेरा साथ नही देता है कहता है की यह गलत बात है तुम को उस को पर गुस्सा नही आना चाहिए ? क्यो नही आना चाहिए हम नोर्मल इन्सान है हममें भी बैर प्यार सारे भाव आते है to गुस्सा भी naturally आएगा ही हम कोई महात्मा to हैं नही , to में समझती हू की एक अच्छा साथी आपका साथ देगा और वोह भी उस पर गुस्सा होगा या चलो गुस्सा नही to कम से कम आप का मत सुन to लेगा ।
मेरा साथी जब किसी पर गुस्सा होता है to में उसका साथ देती हू क्यो की में उसकी साथी हू जिस ससे उसको खुशी मिलती है में वही करती हू और बदले में यही आशा भी करती हू पर ऐसा नही होता है ।
चलो भाई आप किसी का निर्णय नही बदला सकते है पर में जानना चाहती हू की आप की क्या राय है इस बारे में -
आप के साथी की किसी से लड़ाई हुई है आप उसका साथ देंगे या उसको ही बुरा भला बोलेगे ? आप उसको सही रास्ता दिखाना चाहते है पर इस तरह से क्या सही है ?
साथ एक बहुत ठोस आधार है , जब मनुष्य को किसी का साथ होता है उसमें १० लोगो की ताक़त आ जाती है भले ही वोह साथ किसी भी प्रकार का हो , साथी आप के पास हो न हो पर उसका साथ होने का अहसास आप को सारी शक्ति दे देता है , जब आप परेशानी में होते है to आप भगवान को याद करते है क्यो ? क्योकि उसका साथ होने का विश्वास आप को सबल बनाता है ।

साथ उसका क्या मिला स्वरों को मेरे साज मिल गए
यह धुन जिंदगी की सदा रहे साथी तू युगों जिए

यह साथ हमारा सदियों का इस में है मिठास और कडवाहट
मेरे दिल में तेरी और तुझमें मेरी आहट ...
( उसके लिए जिसे देख कर मेरी सुबह होती है और रात ख़तम होती है ...)

No comments:

Post a Comment